बीमारी से नोकरी जाने पर मिलेगा मुवावजा -CLAIM DUE TO ILLNESS REASION

By | October 31, 2020
बीमारी से नोकरी जाने पर मिलेगा मुवावजा -CLAIM DUE TO ILLNESS REASION

बीमारी से नोकरी जाने पर मिलेगा मुवावजा -CLAIM DUE TO ILLNESS

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भारत देश को मजदूरों का देश कह सकते है क्योकि अंग्रेजो ने अपने नोकर बनाये रखने के

लिए यहाँ की शिक्षा व्यवस्थाता को बदल कर अपने अनुकूल बना लिया जिसके कारन

काफी सख्या में जनसख्या होने के कारन देश में पढ़े लिखे कामगारों की सख्या बढती चली

गयी अन्त में भारत देश आजाद हो गया लेकिन अंग्रेजो ने भारत के सभी कुटीर उधोगो को

नष्ट कर दिया था जिशशे अब भारतीयों के पास किशी के फैक्ट्री में काम करने के आलावा कोई

भी विकल्प नहीं बचा था

देश में श्रमिक कानून

https://dkhindinews.com/कोर्ट-में-4000-सरकारी-नोकरी-fourth-class-4000-j/

चुकी अंग्रेजो ने अपने फायदे के हिसाब से कानून बना रख्खे थे जो भारतीय श्रमिको का पूरा

पूरा शोषण करते थे जिश्के चलते आम श्रमिको की आर्थिक व् शारीरिक दशा ठीक नहीं थी

अब चुकी देश के विकास पंख लगाना है तो श्रमिको के दशा को सुधारने

के लिए श्रमिक कानून बनाये गए साथ ही श्रम विभाग की स्थापना करके श्रमिको के भविष्य

को सुरक्षित करने के लिए ESI और PPF जैसी योजनाओ को लागु किया गया जिशशे श्रमिको

को समय समय पर ईलाज और बुडापे में पेन्सन मिलाना शुरू हो गयी

लेकिन अब भी श्रमिको के हितो की रक्षा के लिए कुछ सुधारो को होना जरुरी था जो गत दिनों

किये गए है

श्रम कानून में परिवर्तन

MAJDURI LAWA

किशी श्रमिक जब कोई भी कंपनी में काम करता है और लम्बी बीमारी की वजह से नोकरी जाने

का खतरा बना है तो ये बनने वाला कानून आपको राहत की सान्श देगा 8

क्योकि जल्द ही कंपनियों को उन कामगारों को मुवावजा देना पड़ेगा जो लम्बी बीमारी के

कारन नोकरी से निकाल दिए गए

अब तक के श्रम कानून में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जो बीमारी के चलते कामगार को

नोकरी से निकाल देने पर मुवावजा देना पड़े

लेकिन अब ऐसा कानून बनने जा रहा है जिशका नाम है औधोगिक सम्बन्ध संहिता विधेयक 2019

https://dkhindinews.com/railway-nokari-qualification-रेल्वे-नोकरी-किनको-मि/

श्रम कानून विधेयक 2019

जैसा की श्रमिको की परेशानियों को देखते हुए की बड़ी और लम्बी बीमारी होने पर श्रमिक

को नोकरी से हाथ धोना पड़ता था और बीमारी के ईलाज के लिए पैसे भी न होने पर तिल

तिल के जीना पड़ता है

इशलिये पिछले दिसम्बर में केंद्र सरकार ने श्रम पर संसद की स्थायी समिति के सामने इस

तरह के विधेयक को लाया गया

इश विधेयक को श्रम कानून संशोधन भी कह दे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योकि इश्मे पहले

के तीन श्रम कानूनो को मिलाया गया इशमे ट्रैड यूनियन्स एक्ट 1926 ,इंडस्ट्रियल

एम्प्लॉयमेंट (स्टेंडिंग ऑर्डर्स )एक्ट 1946 ,और औधोगिक विवाद अधिनियम 1947 को

सामिल किया गया है।

अभी हाल ही मे जारी एक बिजनेश स्टैंडर्ड की रिपोर्ट से ये जानकारी सामने आई है ।

हाल मे क्या नियम लागु है

औधोगिक विवाद अधिनियम 1947 के मुताबिक छटनी किये जाने पर नियोक्ता के

द्वारा कामगारों को मुवावजा देना पड़ता है लेकिन एक्ट के अनुसार कुछ परिस्थितियों मे

उनको छुट मिली है जिशमे अनुशाश्नात्मक कारवाही भी शामिल है ईश एक्ट के अनुसार

किशि कामगार को लम्बी बीमारी के कारण निकाला जाता है तो उनको मुवावजा देने का

अधिकार नहीं है ।

लेकिन अब ईश कानून के आ जाने पर लोगो को मुवावजा देना होगा आये ईश कानून को सभी

श्रम संगठन के पदाधिकारियों ने श्रमिक के हित मे माना है ।

http://labour.rajasthan.gov.in/

तय अवधि से पहले निकाला तो भी देना होगा मुवावजा

अब कोइ कंपनी श्रमिक को नोकरी से निकालती है तो उसको एक महीने सेलरी और मुवावजा

देना पड़ता है । इशमे हर साल श्रमिक के 15 दिन के वेतन का भुगतान भी शामिल एचओटीए

है । साथ ही ऐसे कामगारों को छटनी से बचाने का भी प्रावधान है जिनहे एक निश्चित समय

पर नोकरी के लिये रक्खा गया था हालाकी जब एक निश्चित समय से पहले कंपनी कामगार

को निकालती है तो उनको मुवावजा देने का अधिकार होगा लेकिन समय के पूरा होने

पर निकालने पर कोइ मुवावजा नहीं देना होगा

किस मामले मे मुवावजा नहीं मिलेगा

ईश विधेयक के अनुशार किशी भी नियोक्ता ने एक अनुबन्ध किया है और उसके मुताबिक़

वह समय पूरा हो गया तो ऐसी स्थिति मे कामगार को कोई भी मुवावजा राशि नियोक्ता

द्वारा अदा नहीं की जायेगी लेकिन नियोक्ता उश अवधि से पहले कामगार को निकालते है

तो कामगार मुवावजे का हकदार होगा ।

आर्टिकल का उद्देशय

इस आर्टिकल के जरिये आम जन को बताया गया है की आम नागरिक जो बीमारी के कारण बेरोजगार हो जाता है तो उसकी आर्थिक स्थिति ढगमगा जाती है जिससे आम नागरिक दिन ब दिन परेशानी मे गिर जाती है एक और उसके पास इलाज का पैसा नहीं रहता है जिसके कारण वह इलाज भी नहीं करा पाता है साथ ही उसके खाने दाने की समस्या भी पैदा हो जाती है ।

आर्टिकल के जरिये निजी कामगारों को जानकारी मिल पाएगी की बीमारी के कारण नोकरी जाने पर भी अब खर्चा मिल पाएगा जिससे आमजन के सामने परेशानी नहीं आ पाएगी

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