Class 9 Moments Ch-1 Hindi explanation

By | August 14, 2021

Class 9 Moments Chapter- The lost child Hindi Explanation,Class 9 Moments Ch-1 Hindi explanation

  1. It was the festival of spring. From the wintry shades of narrow lanes and alleys emerged a gaily clad humanity. Some walked, some rode of horses, others sat, being carried in bamboo and bullock carts. One little boy ran between his father’s legs, brimming over with life and laughter.
  2. Class 9 Moments Ch-1 Hindi explanation

“Come, child come,” called his parents, as he lagged behind, fascinated by the toys in the shops that lined the way.

  1. वसंत का पर्व था। शीतकाल में प्रसन्नचित लोग रंग-बिरंगे परिधानों में तंग गलियों में से बाहर निकाल रहे थे। कुछ पैदल चल रहे थे; कुछ घोड़ो में सवार थे; अन्य बैठे थे; कुछ बैलगाड़ियों में बैठे जा रहे थे। एक छोटा-सा बालक खुशी से उच्छलता-कूदता अपने पिता की टाँगो के बीच से भागा जा रहा था।

रास्ते के साथ-साथ कतरबुद्ध दुकानों में सजे खिलौनो से आकर्षित होकर जब वह पीछे रह जाता है, उसके माता-पिता ने पुकारा, ” आओ बच्चे, आओ।”

2. He hurried towards his parents, his feet obedient to their call, his eyes still lingering on the receding toys. As he came to where they had stopped to wait for him, he could not suppress the desire of his heart, eve though he well knew the old, cold stare of refusal in their eyes.

Class 9 Moments Chapter- The lost child Hindi Explanation

“I want that toy,” he pleaded.

His father looked at him red-eyed, in his familiar tyrant’s way.

His mother, melted by the free spirit of the day was tender and, giving him her finger to hold. said, “Look, child, what is before you!”

It was a flowering mustard-field, pale like melting gold as it swept across miles and miles of even land.

2. वह अपने माता-पिता की तरफ जाने की जल्दबाजी कर रहा था, उसके पैर उनके बुलावे का अनुकरण करते। परंतु उसकी आंखे पीछे रह गए खिलौने पर टिकी थी। जब वह वहाँ पहुँच गया जहां उसके माँ-बाप उसका रुककर इंतज़ार कर रहे थे, वह अपनी दिली इककाका दमन नहीं कर सक्स, यद्यपि फिर उसकी घूमती आंखो में छिपे इंकार को भली भांति समझता था।

“मुझे वह खिलौना चाहिए, ” उसने अनुरोध किया।

उसके पिता हमेशा की तरफ आततायी तरीके से आंखे लाल करके उसकी ओर घूरे। उसकी माँ कोमल दिवस की नि:सावरथ भावना से द्रवित होकर तथा उसे पकड़ने के लिए अपनी अंगुलीदेते हुए बोली,” देखो, बच्चे, तुम्हारे नीचे क्या है!”

यह पुष्पित सारसो का खेत था जो समतल भूमि पर मीलो-दर-मीलो पिघले हुए सोने की भांति एक व्यापक खेत में फैला था।

3. A group of dragon-flies were bustling about on their gaudy purple wings, intercepting the flight of a lone black bee or butterfly in search of sweetness from the flowers. The child followed them in air with his gaze, till one of them would still its wings and rest, and he would try to catch it. But it would go fluttering, flapping, up into the air, when he had almost caught it in his hands. Then his mother gave a cautionary call: “Come, child, come, come on to the footpath.”

Class 9 Moments Ch-1 Hindi explanation

3. ड्रैगन-माखियों का समूह अपने चमकदार बैगनी पंखो के साथ भिनभिना रहा था जो पुष्पो के मकरंद की तलाश में, जो रास्ते में मक्खी या तितली के रास्ते को काटकर जा रहा था। बच्चा उसमें किसी एक पर नज़र जमा कर देखता रहता था और जब वह अपनी पंखुड़ियान स्थिर कर विश्राम करने के लिए बैठ जाती तो वह उसे पकड़ने का प्रयास करता परंतु जब वह लगभग उसे अपने हाथो में पकड़ने वाला ही होता था तो वह फिर पंखुड़ियाँ की फदफड़ाती उद जाती थी। तब उसकी माँ ने उसे चेतावनी दी। “आओ बच्चे, आओ, फूटपाथ पर चलो”।

4. He ran towards his parents gaily and walked abreast of them for a while, being, however, soon left behind, attracted by the little insects and worms along the footpath that were teeming out from their hiding places to enjoy the sunshine.

“Come, child, come!” his parents called from the shade of a grove where they had seated themselves on the edge of a well. He ran towards them.

A shower of young flowers fell upon the child as he entered the grove, and, forgetting his parents, he began to gather the raining petals in his hands. But lo! he heard the cooing of doves and ran towards his parents, shouting, “The dove! The dove!” The raining petals dropped from his forgotten hands.

“Come, child, come!” they called to the child, who had now gone running in wild capers round the banyan tree, and gathering him up they took the narrow, winding footpath which led to the fair through the mustard fields.

4. वह खुशी के मारे अपने माता-पिता की ओर भागा तथा कुछ देर तक अपने माता-पिता के साथ चला। फिर भी वह पीछे, उन कीड़ो-मकोड़ो की पंक्तियो को दहने के लिए पीछे रह गया था जिओपने गुप्त बिलो से धूप सेंकेने के लिए बाहर निकाल रहे थे।

“आओ, बच्चे, बच्चे!” उसके माता-पिता व्रक्षों के कुंज में एक कूप के किनारे बैठ गए, वहीं से बुलाया। वह उनकी ओर भाग कर आया।

जब बच्चा उन कुंजो में घुसा तो नए खिले पुष्पों की बोझार हुई और वह अपने माता-पिता को भूलकर वर्षा हो रही कलियों को अपने हाथो में समेटने लगा। ताबुसे फाख्ता की गुटर-गू सुनाई दी और वह “फाख्ता! फाख्ता!” कहता हुआ अपने माता-पिता की ओर भागा। वर्षा हो रही कलियाँ उसके विस्मृत हाथो से नीचे गिर गयी।

उन्होने बच्चे को पुकारा “आओ, बच्चे, आओ!” जो बरगद के व्रक्ष के चारो ओर खुश होकर उछल-कूद करने लगा, उसे लेकर वे सारसो के खेतो में घूमकर जाने वाली तंग पगडंडी पर चल पड़े जो मेले की दिशा को जाती थी।

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5. As they neared the village the child could see many other footpaths full of throngs, converging to the whirlpool of the fair, and felt at once repelled and fascinated by the confusion of the world he was entering.

A sweetmeat seller hawked,” gulab-jamun, rasgulla, burfi.. jalebi,” at the corner of the entrance and a crowd pressed round his counter at the foot of an architecture of many colored sweets, decorated with leaves of silver and gold. The child started open-eyed and his mouth watered for the burfi that was his favourite sweet. ” I want that burfi..” he slowly murmured. But he half knew as he begged that his plea would not be heeded because his parents would say he was greedy. So without waiting fr an answer he moved on.

5. जब वे गाँव के नजदीक पहुंचे, बच्चे ने भीड़ से भरी कई पगदंडिया देखि,जो मेले की ओर जाती थी, और वह भ्रमित संसार जिसमेनवाह प्रवेश कर रहा था, के प्रति पीछे हो रहा था तथा आकर्षित भी हो रहा था। मेले के प्रवेश पर एक सोने में एक मिष्ठान विक्रेता आवाज़े दे रहा था, “गुलाब-जामुन, रसगुल्ला, बर्फी… जलेबी'”, जो सोने-चांदी के पात्रो से सजी हुई मिठाइयों के ढेर के चरो ओर लोगों की भीड़ धक्कम-धक्का हो रही थी। बच्चा टकटकी लगाए आंखो से देखता रहा तथा बर्फी को देख कर उसके मुह में पानी आ गया जो उसकी मनपसंद मिठाई थी। वह धीरे से भुनभुनाया , “मुझे वह बर्फी चाहिए। ” परंतु जब उसने बर्फी मांगी तो वह समझता था की उसके माँ-बाप उसकी मांग पूरी नहीं करेंगे और कहेंगे की तू चटोरा है। इसलिए वह बिना उत्तर का इंतज़ार किए आगे बढ़ गया।

6. A flower-seller hawked,” A garland of gulmohur, a garland of gulmohur !” The child seemed irresistibly drawn. He went towards the basket where the flowers lay heaped and half murmured, “I want that garland.” But he well knew his parents would refuse to buy him those flowers because they would say that they were cheap. So, without waiting for an answer, he moved on.

6. एक फूल-विक्रेता ने आवाज लगाई,” गुल्मौहर की माला, गुल्मौहर की माला!” बच्चा उसकी तरफ खींचा चला गया। वह टोकरी की तरफ गया जहां फूलों का ढेर पड़ा था तथा कुछ भुनभुनाया,” मुझे वह माला चाहिए । ” परंतु वह अच्छी तरह जानता था की उसके माँ-बाप उन फूलो को खरीदने से मना कर देंगे क्योकि वे कहेंगे की वे सस्ते है। इसलिए उत्तर किए बिना वह चला गया।

7. A man stood holding a pole with yellow, red, green and purple balloons flying from it. The child was simply carried away by the rainbow glory of their silken colors and he was filled with an overwhelming desire to possess them all. But he well knew his parents would never buy him the balloons because they would say he was too old to play with such toys. So he walked on farther.

7. एक आदमी एक लटठ्ठा पकड़े खड़ा था जिसमें पीले, लाल, हरे, तथा बंगनी गुब्बारे उस पर लटक रहे थे। बच्चा उंक इंद्रधनुष आभा से खींचा चला गया और उसके मेन में उन सभी सिल्की रंग के गुब्बारों को प्राप्त करने की प्रबल इच्छा उमड़ गयी। परंतु उसे अच्छी तरह से पता था की उसके माता-पिता कभी नहीं खरीदकर देंगे क्योकि वे कहेंगे की वह इतना बड़ा है की ऐसे खिलौने के साथ नहीं खेल सकता इसलिए वह आगे चला गया।

8. A snake-charmer stood playing a flute to a snake which coiled itself in a basket, its head raised in a graceful bend like the neck of a swan, while the music stole into its invisible ears like the gentle rippling of an invisible waterfall. The child went towards the snake-charmer. But, knowing his parents had forbidden him to hear such coarse music as the snake-charmer played, he proceeded farther.

8. एक सपेरा खड़े होकर सांप के लिए बांसुरी बजा रहा था जो टोकरी में कुंदई मार कर बैठा था, उसकी गर्दन शानदार झुकाव जैसे हंस की गर्दन की जैसी हंस की गर्दन जैसी उठी हुई थी। जबकि संगीत अद्रश्य प्रपात की भाँति धीरे-धीरे उसके अद्रश्य कानों में जा रहा था। बच्चा सपेरे के नजदीक गया, परंतु अपने माता-पिता को याद करके सपेरे द्वारा बजाए गए भद्दे संगीत को नहीं सुन रहा था, वह आगे बढ़ गया था।

9. There was a roundabout in full swing. Men, women and children, carried away in a whirling motion, shrieked and cried with dizzy laughter. The child watched them intently and the he made a bold request:” I want to go on the roundabout, please, Father, Mother.”

There was no reply. He turned to look at his parents. They were not there, ahead of him. He turned to look on either side. They were not there. There was no sign of them.

9. एक झूला पूरे ज़ोर से घूम रहा था। पुरुष व महिलाएँ तथा बच्चे घुमावदार गति से उत्साहित होकर खीच रहे थे तथा हुधड़ंगपूर्ण परिहास कर रहे थे। बच्चा इन्हे इरादतन देखता रहा ओर तब उसने सख्त अनुरोध किया: ” मैं भी झूले में बैठना चाहता हूँ क्रपया, माँ, पिता। ” कोई जवाब नहीं मिला। उसने मुड़कर अपने माता-पिता को देखा, वे वहाँ नहीं थे, उससे आगे थे। वह दूसरी तरफ देखने के लिए मुड़ा। उसने पीछे देखा। उनका कोई नामोनीशान नहीं था।

10. A full, deep cry rose within his dry throat and with a sudden jerk of his body he ran from where he stood, crying in real fear, “Mother, Father.” Tears rolled down from his eyes, hot and fierce: his flushed face was convulsed with fear. Panic-stricken, he ran to one side first, then to the other, hither and thither in all directions, knowing not where to go. “Mother, Father,” he wailed. His yellow turban came untied and his clothes became muddy.

Having run to and fro in a rage of running for a while, he stood defeated, his cries suppressed into sobs. At little distances on the green he could see, through his filmy eyes, men and women talking. He tried to look intently among the patches of bright yellow clothes, but there was no sign of his father and mother among these people, who seemed to laugh and talk just for the sake of laughing and talking.

Class 9 Moments Chapter- The lost child Hindi Explanation

10. उसके गंभीर सूखे गले में से एक गंभीर चीख उठी, तथा अचानक एक झटके के साथ जहां खड़ा हुआ था, वास्तविक दर से काँपता हुआ,”माँ,माँ ” कहता हुआ भागा। गरम व भयानक आँसू उसकी आंखो से टपकने लगे, उसका दमकता हुआ चेहरा भय से ऐंठ गया। व्यथित होकर, एक ओर से दूसरी ओर भागने लगा, यहाँ वहाँ सभी दिशाओं,में यह न जानते हुए की कहाँ जाना है, “माँ, पिता,” पुकार-पुकार कर दु:खी हो रहा था। उसकी पीलिपगड़ी खौ गाई ओर उसके कपड़े मैले हो गए।

गुस्से में इधर-उधर कुछ देर दौड़ने के बाद वह हारकर खड़ा हो गया। उसकी चींखे सिसकियों में दब गाई। उसने थोड़ी दूर हरी घास पर अपनी धुंधली आँख से पुरुषों व महिलाओं को बात करते हुए देखा। उसने हल्के पीले कपड़े पहने हुए उन लोगों के समूह में अपने माँ-बाप को ढूँढने की कोशिश की परंतु उन लोगों में जो परिहास करने तथा बतियाने के लिए हंस रहे थे में उनका नामोनीशान नहीं था।

11. He ran quickly again, this time to a shrine to which people seemed to be crowding. Every little inch of space here was congested with men, but he ran through people’s legs, his little son lingering: “Mother, Father!” Near the entrance to the temple, however, the crowd became very thick: men jostled each other, heavy men, with flashing, murderous eyes and hefty fro by their brutal movements, he might have been trampled underfoot, had he not shrieked at the highest pitch of his voice, “Father, Mother!” A man in the surging crowd heard his cry and, stopping with great difficulty, lifted him up in his arms.

“How did you get here, child? Whose baby are you?” the man asked as he steered clear of the mass. The child wept more bitterly than ever now and only cried, “I want my mother, I want my father!”

The man tried to soothe him by taking him to the roundabout. “Wil you have a ride on the horse?” he gently asked as he approached the ring. The child’s throat tore into a thousand shrill sobs and he only shouted, “I want my mother, I want my father!”

11. एक बार वह तेजी से दौड़ा, इस बार वह एक मंदिर की ओर गया जहां लोग भीड़ लगते दिखते थे। चप्पा-चप्पा लोगों से खचाखच भरा था परंतु वह लोगों की टाँगो के बीच से दौड़ा, हाकी सिसकीय भरते हुए “माँ, पिता!” पुकार रहा था। मंदिर के प्रवेश द्वार के समीप भीड़ बहुत घनी थी, फिर भी भीड़ और ज्यादा घनी हो रही थी। भरी भरकम लोग, बलिष्ठ कंधे वाले,दमकती हुए कातिल निगाहें थीं, एक-दूसरे से धक्कम-धक्का कर रहे है। प्यारे बच्चे ने उन लोगों के पावों के मध्य से घुसने का प्रयत्न कर रहा था। परंतु उसकी पाशविक चहल-कदमी में ठोकरें खाकर इसधर-उधर लुढ़कने लगा। वह किसी के पाँव के नीचे आकार कुचला जाता यदि वह पूरे ज़ोर से न चीखता-“माँ-बाप”। एक व्यक्तिने उड़कती भीड़ में उसकी चीख सुनी तथा बड़ी कठिनाई से झुककर उसने बच्चे को अपनी बाहों में उठा लिया।

“तुम यहाँ कैसे आए, बच्चे? किसके बच्चे हो?” उस भीड़ से बाहर निकालकर उस व्यक्ति ने पूछा। बच्चा फूट-फूटकर रो रहा था, “मुझे मेरी माँ चाहिए, मुझे मेरे पिता चाहिए। “

वह व्यक्ति बच्चे को चुप कराने के लिए उसे झूले के पास ले गया और पूछा,” तुम घोड़े पर चढ़ोगे? बच्चे के गले से हज़ारों वेदना भरी सिसकियाँ फूट रही थी और वह बिलकुल चिल्ला रहा था:” मुझे मेरी माँ चाहिए, मौजे मेरा पिता चाहिए!”

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12. The man headed towards the place where the snake-charmer still played on the flute to the swaying cobra. “Listen to that nice music, child!” he pleaded. But the child shut his ears with his fingers and shouted his double-pitched strain: “I want my mother, I want my father!” The man took him near the balloons, thinking the bright colors of the balloons would distract the child’s attention and quieten him. “Would you like a rainbow-colored balloon?” he persuasively asked. The child turned his eyes from the flying balloons and just sobbed,” I want my mother, I want my father!”

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12. वह व्यक्ति उसे उस तरफ ले गया जहां सपेरा बांसुरी बाजकर कोबरा को नाचा रहा था। उसने बच्चे को कहा,” यह सुंदर संगीत सुनो, बच्चे!” परंतु बच्चे ने अंगुलियों से अपने कान बंद कर किए तथा दोगुनी उचि आवाज़ में बोला-“मुझे तो अपनी माँ चाहिए, अपना बापू चाहिए। वह व्यक्ति उसे गुब्बारे वाले के पास ले गया, यह सोचते हुए की उनके आकर्षक रंगो को देखकर बचे का ध्यान बाँट जाएगा और वह शांत हो जाएगा I उसने बच्चे को फुसलाते हुए कहा, “क्या तुम एंद्रधनुष रंग का गुब्बारा पसंद करोगे ?” परंतु बच्चे ने उड़ते हुए गुब्बारों की ओर से नजर मोड ली तथा सिसकिया भरी , “मुझे मेरी माँ चाहिए, मुझे मेरे पिता चाहिए I”

13. The man, still trying to make the child happy, bore him to the gate where the flower-seller sat. “Look! Can you smell those nice flowers, child! Would you like a garland to put round your neck?”

The child turned his nose away from the basket and reiterated his sob,” I want my mother, I want my father!”

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Thinking to humour his disconsolate charge by a gift of sweets, the man took him to the counter of the sweet shop. “What sweets would you like, child?” he asked. The child turned his face from the sweet shop and only sobbed, “I want my mother, I want my father!’

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13. उस व्यक्ति ने बच्चे को खुश करने का प्रयास करता रहा , ऊबने से बचाने के लिए उसे मेले के द्वार क पास ले गया जहा फूल विक्रेता बैठा था I “देखो बच्चे इन सुंदर पुष्पो की खुशबु ले सकते हो I क्या तुम अपने गले मे माला डालना चोहोगे ?” बच्चे ने अपनी नाक टोकरी से मोड ली तथा फिर सिसकिया भरी और कहा, “मुझे तो मेरी माँ चाहिए, “मुझे तो मेरा बापू चाहिए?”

यह सोचकर की दुखी बच्चा मिठाई से खुश हो जायेगा, वह व्यक्ति उसे मिठाई की दुकान क काउंटर पर ले गया और पूछा, “कोनसी मिठाई लोगे बच्चे ?” उसने पूछा I बच्चे ने मिठाई की दुकान से अपना मुह मोड लिया और केवल सिसकिया भरी, “मुझे मेरी माँ चाहिए, मुझे मेरे बापू चाहिए आई”

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